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उत्तराखंड की ज़मीनी आवाज़ !
नौकरी तय थी… फिर एक निजी सवाल ने सब बदल दिया
स्त्री संवाद | एक व्यक्तिगत अनुभव मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैं देश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में, असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए इंटरव्यू देने गई थी। कई दिनों की तैयारी के बाद मैं वहाँ पहुँची थी। अपनी पढ़ाई, और शिक्षण अनुभव को लेकर मैं आश्वस्त थी। इंटरव्यू की शुरुआत भी अच्छी हुई। मुझसे मेरे शोध विषय, पढ़ाने के तरीकों और अकादमिक(Academic) रुचियों के बारे में सवाल पूछे गए। मुझे लगा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जा रही है। कुछ देर बाद चर्चा अचानक मेरे निजी जीवन की ओर मुड
Priyanka Sharma
Mar 31
चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग: क्या है पूरा विवाद?
उत्तराखंड के धार्मिक नेताओं और मंदिर प्रबंधकों ने राज्य सरकार से चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। यह मांग बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को लेकर उठाई गई है। कुछ सप्ताह पहले हरिद्वार की ‘गंगा सभा’ ने भी ऐसी ही मांग की थी। गंगा सभा, गंगा घाटों के धार्मिक प्रबंधन से जुड़ा एक ट्रस्ट है। उसने 2027 के कुंभ मेले के दौरान गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। चारधाम मंदिर प्रवेश पर रोक के पक्ष में तर्क मंदिर आस्था और पूजा
Admin
Feb 11
अगर चारधाम यात्रा ‘हिंदू-only’ हो गई, तो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सिर्फ़ श्लोक बनकर रह जाएगा
Source- AI generated चारधाम यात्रा पर गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर उठ रहा विवाद अब केवल एक प्रशासनिक या धार्मिक फैसला नहीं रह गया है। यह बहस सीधे-सीधे भारत की सांस्कृतिक आत्मा और हिंदू धर्म की वैश्विक छवि पर सवाल खड़े करती है। पिछले लेख में हम इसके संभावित फायदे और नुकसान पर चर्चा कर चुके हैं। लेकिन इस बहस का एक और पहलू है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता - धर्म की वैश्विक स्वीकार्यता का मुद्दा। बीते कुछ दशकों में हिंदू दर्शन ने दुनिया को आकर्षित किया है। योग, वेदांत, गीत
Admin
Feb 8
उत्तराखंड से पलायन रोकने के दावे हर साल क्यों खोखले साबित हो रहे हैं?
Photo source- AI generated हर चुनाव से पहले एक वादा ज़रूर दोहराया जाता है- “अब उत्तराखंड से पलायन रुकेगा।” नई योजनाएं आती हैं, आयोग बनते हैं, रिपोर्टें जारी होती हैं। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि हर साल गांव और खाली होते जा रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि पलायन हो रहा है या नहीं। सवाल यह है कि इसे रोकने के दावे हर बार असफल क्यों हो जाते हैं? सरकारों का कहना है कि रोजगार बढ़ रहा है और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। कागजों में सब कुछ ठीक दिखता है। लेकिन अगर आप किसी पहाड़ी गांव
Admin
Feb 6
उत्तराखंड में वन भूमि कब्ज़े पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त रुख
उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर हो रहे वन भूमि कब्ज़े (लैंड ग्रैबिंग) के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बेहद सख़्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अधिकारी “मूक दर्शक” बने रहे, जबकि उनकी आँखों के सामने वन भूमि पर अवैध कब्ज़ा किया जा रहा था। प्रशासन की विफलता पर सवाल अदालत ने वन संरक्षण को राज्य का संवैधानिक दायित्व बताते हुए प्रशासन की विफलता पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह स्थि
Admin
Jan 20
Winter Forest Fire में उत्तराखंड शीर्ष पर, दो महीनों में 1900 से अधिक अलर्ट: Forest Survey of India की रिपोर्ट
Image source- Self उत्तराखंड ने इस सर्दी के मौसम (नवंबर से अब तक) में लगभग 1,900 वनाग्नि (forest fire) अलर्ट प्राप्त किए हैं, जो पूरे देश में सबसे अधिक संख्या है। इसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड का आंकड़ा शीर्ष पर है।सामान्यतः बर्फ और ठंड से सुरक्षित रहने वाले जंगलों में इस समय आग लगना जलवायु परिवर्तन, घटती नमी और बिगड़ते वन प्रबंधन की ओर इशारा करता है । उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने TOI को बताया कि 20% अलर्ट R
Admin
Jan 20
शीर्ष समाचार


नौकरी तय थी… फिर एक निजी सवाल ने सब बदल दिया
स्त्री संवाद | एक व्यक्तिगत अनुभव मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैं देश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में, असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए इंटरव्यू देने गई थी। कई दिनों की तैयारी के बाद मैं वहाँ पहुँची थी। अपनी पढ़ाई, और शिक्षण अनुभव को लेकर मैं आश्वस्त थी। इंटरव्यू की शुरुआत भी अच्छी हुई। मुझसे मेरे शोध विषय, पढ़ाने के तरीकों और अकादमिक(Academic) रुचियों के बारे में सवाल पूछे गए। मुझे लगा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जा रही है। कुछ देर बाद चर्चा अचानक मेरे निजी जीवन की ओर मुड


चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग: क्या है पूरा विवाद?
उत्तराखंड के धार्मिक नेताओं और मंदिर प्रबंधकों ने राज्य सरकार से चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। यह मांग बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को लेकर उठाई गई है। कुछ सप्ताह पहले हरिद्वार की ‘गंगा सभा’ ने भी ऐसी ही मांग की थी। गंगा सभा, गंगा घाटों के धार्मिक प्रबंधन से जुड़ा एक ट्रस्ट है। उसने 2027 के कुंभ मेले के दौरान गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। चारधाम मंदिर प्रवेश पर रोक के पक्ष में तर्क मंदिर आस्था और पूजा


अगर चारधाम यात्रा ‘हिंदू-only’ हो गई, तो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सिर्फ़ श्लोक बनकर रह जाएगा
Source- AI generated चारधाम यात्रा पर गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर उठ रहा विवाद अब केवल एक प्रशासनिक या धार्मिक फैसला नहीं रह गया है। यह बहस सीधे-सीधे भारत की सांस्कृतिक आत्मा और हिंदू धर्म की वैश्विक छवि पर सवाल खड़े करती है। पिछले लेख में हम इसके संभावित फायदे और नुकसान पर चर्चा कर चुके हैं। लेकिन इस बहस का एक और पहलू है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता - धर्म की वैश्विक स्वीकार्यता का मुद्दा। बीते कुछ दशकों में हिंदू दर्शन ने दुनिया को आकर्षित किया है। योग, वेदांत, गीत


उत्तराखंड से पलायन रोकने के दावे हर साल क्यों खोखले साबित हो रहे हैं?
Photo source- AI generated हर चुनाव से पहले एक वादा ज़रूर दोहराया जाता है- “अब उत्तराखंड से पलायन रुकेगा।” नई योजनाएं आती हैं, आयोग बनते हैं, रिपोर्टें जारी होती हैं। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि हर साल गांव और खाली होते जा रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि पलायन हो रहा है या नहीं। सवाल यह है कि इसे रोकने के दावे हर बार असफल क्यों हो जाते हैं? सरकारों का कहना है कि रोजगार बढ़ रहा है और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। कागजों में सब कुछ ठीक दिखता है। लेकिन अगर आप किसी पहाड़ी गांव


उत्तराखंड में वन भूमि कब्ज़े पर सुप्रीम कोर्ट का सख़्त रुख
उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर हो रहे वन भूमि कब्ज़े (लैंड ग्रैबिंग) के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बेहद सख़्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अधिकारी “मूक दर्शक” बने रहे, जबकि उनकी आँखों के सामने वन भूमि पर अवैध कब्ज़ा किया जा रहा था। प्रशासन की विफलता पर सवाल अदालत ने वन संरक्षण को राज्य का संवैधानिक दायित्व बताते हुए प्रशासन की विफलता पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह स्थि
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