

चारधाम मंदिर प्रवेश (Temple Ban) विवाद: क्या है मुद्दा? जानिए दोनों पक्षों की राय
Photo- AI Generated उत्तराखंड के धार्मिक नेताओं और मंदिर प्रबंधकों ने राज्य सरकार से चारधाम मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है।यह मांग बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को लेकर उठाई गई है। कुछ सप्ताह पहले हरिद्वार की ‘गंगा सभा’ ने भी ऐसी ही मांग की थी। गंगा सभा, गंगा घाटों के धार्मिक प्रबंधन से जुड़ा एक ट्रस्ट है। उसने 2027 के कुंभ मेले के दौरान गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। चारधाम मंदिर प्रवेश पर रोक के पक्ष में तर्क


अगर चारधाम यात्रा ‘हिंदू-only’ हो गई, तो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ सिर्फ़ श्लोक बनकर रह जाएगा
Source- AI Generated चारधाम यात्रा पर गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर उठ रहा विवाद अब केवल एक प्रशासनिक या धार्मिक फैसला नहीं रह गया है। यह बहस सीधे-सीधे भारत की सांस्कृतिक आत्मा और हिंदू धर्म की वैश्विक छवि पर सवाल खड़े करती है। पिछले लेख में हम इसके संभावित फायदे और नुकसान पर चर्चा कर चुके हैं। लेकिन इस बहस का एक और पहलू है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता - धार्मिक जनसंख्या और हिंदू धर्म की वैश्विक स्वीकार्यता का मुद्दा। अक्सर हिंदू धर्म की तुलना इस्लाम और ईसाई धर्म से की



















